भगवान जगन्नाथ के रथों का निर्माण शुरू

6 05 2007

बढ़ई और कारीगर भगवान जगन्नाथ की पारंपरिक रथ यात्रा के लिए विशाल तीन रथों के निर्माण में लग गए हैं। इसके साथ ही इस सालाना रथ यात्रा की तैयारी जोर पकड़ने लगी है। रथ यात्रा में भाग लेने के लिए देश-दुनिया से हजारों श्रद्धालु पवित्र धर्मनगरी पुरी आते हैं।
परंपरा के मुताबिक इन रथों के निर्माण की रस्म हिन्दू पंचांग के बैसाख महीने के शुक्ल पक्ष के तीसरे दिन से शुरू होती है। मंदिर के अधिकारी लक्ष्मी धर पूजा पांडा ने इसकी जानकारी दी। इस साल यह दिन शुक्रवार को पड़ा। शुक्रवार से इन रथों के निर्माण की रस्म शुरू हो गई। पांडा ने बताया कि करीब 100 कारीगरों ने इन रथों का निर्माण शुरू कर दिया है। इन रथों का निर्माण भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के लिए किया जाता है। इन तीनों की प्रतिमाओं को इन विशाल रथों पर रखकर घुमाया जाता है। भुवेनश्वर से 56 किलोमीटर दूर जगन्नाथ पुरी शहर में इस धार्मिक जलसे को देखने के लिए लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है। रथ यात्रा की शुरुआत जगन्नाथ मंदिर से होती है और रथों को खींच कर इसी शहर के एक दूसरे मंदिर गोंदीचा मंदिर तक ले जाया जाता है।
इस साल यह रथ यात्रा 16 जुलाई से शुरू होगी। इन विशाल काष्ठ ढांचों को खींचने के लिए लाखों भक्त पुरी में जमा होंगे। चार मोटी रस्सियों के सहारे प्रत्येक रथ को खींचा जाता है। भगवान जगन्नाथ के रथ को नंदीघोष, बलभद्र के रथ को तलाध्वज और सुभद्रा के रथ को पद्म ध्वज कहा जाता है। नंदीघोष में 16 पहिए होते हैं और इसकी ऊंचाई 45 फुट होती है। रथ पर बने मंदिर पर लाल और पीले रंग के कपड़े चढ़ाए जाते हैं। तलाध्वज रथ की ऊंचाई 44 फुट होती है और इसमें 14 पहिए होते हैं। इस रथ की छत का रंग लाल और हरा होता है। रथ के शीर्ष हिस्से पर एक फल रखा जाता है। पद्म ध्वज रथ की ऊंचाई 43 फुट होती है। इसमें 22 पहिए होते हैं।


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