स्थानीय प्रशासन द्वारा प्रतिबंध के बाजवूद उड़ीसा में एक काली मंदिर में देवी को खुश करने के लिए करीब 650 बकरों की बलि दे दी गई। बकरों की बलि भद्रक जिले के रामेश्वर गांव के रक्षया काली मंदिर में दी गई।
यूं तो प्रशासन ने पशुओं की बलि पर रोक लगा रखी है। इसके बाजवूद मंदिर में बड़े पैमाने पर इन बेजुबानों की बलि ली गई। कुछ अधिकारियों और ग्रामीणों ने बड़े पैमाने पर पशुओं की बलि दिए जाने की पुष्टि की है। गांव के एक निवासी दिबाकर बारीक ने कहा कि हर साल हिन्दू महीने चैत्र में बकरों की बलि दी जाती है। हम रक्षया काली को बकरों की बलि इसलिए देते हैं, क्योंकि देवी मां हमारे गांव की रक्षक है और पिछले 72 वर्षों से यह परिपाटी चली आ रही है। इससे पहले इस मंदिर में भैंसों की बलि दी जाती थी। अब उनकी जगह बकरों को काटा जाता है। यहां तक कि स्थानीय पुलिस के कई जवानों ने भी इस प्रशासनिक रोक के उल्लंघन को होते देखा।
एक पुलिस अधिकारी ने स्वीकार किया कि मंदिर में बलि बेदी के चारों ओर खून के परनाले बह रहे थे। यहां तक कि कुछ लोग बकरों का खून सिर पर लगा कर देवी से आशीर्वाद की कामना कर रहे थे। अधिकारी ने अपना नाम गुप्त रखने की शर्त पर कहा कि कई लोगों को वहां खून का तिलक लगाए देखा गया। पिछले साल पशु अधिकारवादी कार्यकर्ताओं ने इस मंदिर में पशुओं की बलि पर हंगामा खड़ा किया था। तब राज्य के राजस्व मंत्री मनमोहन सामल की मौजूदगी में ही इस मंदिर में पशुओं की बलि दे दी गई थी। मंत्री को तब स्पष्टीकरण देना पड़ा था। एक सप्ताह पहले जिला प्रशासन ने इस बलि प्रथा को बंद कराने की कोशिश की थी। यहां तक कि शीर्ष जिला एवं पुलिस अधिकारी ने मंदिर कमेटी के सदस्यों और ग्रामीणों से इस मुद्दे पर बातचीत भी की थी। सूत्र ने बताया कि यह फैसला लिया गया था कि मंदिर में प्रतीकात्मक तौर पर एक ही पशु की बलि दी जाएगी, लेकिन इस समझौते का उल्लंघन किया गया।
The killing and taking of any life in a temple, or anywhere else for that matter, is barbaric and disgusting. I am totally appalled at the sight of the scene depicted in your newsletter. The peaceful Hindus should hang their heads with shame for keeping quiet about this butchery and bloodthirst.
This is butchery and blood-thirst, which should not be tolerated anywhere.
I have tried to enter my comments but you seem to ignore then by your censorship.
Does not do justice to Hindu philosophy.
I think it is wrong to show such shocking picture on your web site. It does not convey the full picture to non hindi readers.
i think it is wrong, we have no right to take any bodies life in such amount andshowing pictures on internet……..