॥ वृहस्पतिवार व्रत ॥

21 04 2007

किसी भी माह के शुक्ल पक्ष में अनुराधा नक्षत्र और गुरुवार के योग के दिन इस व्रत की शुरुआत करना चाहिए। इस दिन भगवान शिव की पूजा-अर्चना की जाती है। नियमित सात व्रत करने से गुरु ग्रह से उत्पन्न होने वाला अनिष्ट नष्ट होता है। कथा और पूजन के समय मन, कर्म और वचन से शुद्ध होकर मनोकामना पूर्ति के लिए बृहस्पति देव से प्रार्थना करनी चाहिए। पीले रंग के चंदन, अन्न, वस्त्र और फूलों का इस व्रत में विशेष महत्व होता है।

वृहस्पतिवार व्रत कैसे करें
सूर्योदय से पहले उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर पीले रंग के वस्त्र पहनने चाहिए। शुद्ध जल छिड़ककर पूरा घर पवित्र करें। घर के ही किसी पवित्र स्थान पर वृहस्पति की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। तत्पश्चात पीत वर्ण के गंध-पुष्प और अक्षत से विधिविधान से पूजन करें। इसके बाद निम्न मंत्र से प्रार्थना करें-
धर्मशास्तार्थतत्वज्ञ ज्ञानविज्ञानपारग।
विविधार्तिहराचिन्त्य देवाचार्य नमोस्तु ते॥

तत्पश्चात आरती कर व्रतकथा सुनें। अंत में प्रसाद वितरण कर पहले ब्राह्मण को भोजन कराएँ फिर स्वयं भोजन ग्रहण करें।

वृहस्पतिवार व्रत के दिन क्या करें
इस दिन एक समय ही भोजन किया जाता है। व्रत करने वाले को भोजन में चने की दाल अवश्य खानी चाहिए। वृहस्पतिवार के व्रत में कंदलीफल (केले) के वृक्ष की पूजा की जाती है।

वृहस्पतिवार व्रत के दिन क्या न करें
स्त्रियों को इस दिन कपड़े तथा सिर नहीं धोना चाहिए। स्त्रियों को इस दिन तेल, कंघी व चोटी भी नहीं करना चाहिए।

व्रत लाभ
वृहस्पतिवार व्रत के पूजन से स्त्री-पुरुष को वृहस्पतिदेव की अनुकम्पा से धन-संपत्ति का अपार लाभ होता है। परिवार में सुख तथा शांति रहती है। स्त्रियों के लिए वृहस्पतिवार का व्रत बहुत शुभ फल देने वाला है। वृहस्पतिदेव की पूजा के पश्चात कथा सुनने का विशेष महत्व है। वृहस्पतिवार के व्रत करने और कथा सुनने से विद्या का बहुत लाभ होता है। वृहस्पतिवार का नियमित व्रत रखने वाली स्त्री की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।


Actions

Information

Leave a comment