महीनों से धर्म और सरकार के बीच विचित्र टकराव की वजह रहा पवित्र सांड़ शैम्बो की मौत निश्चित है। शैम्बो को गुरुवार की सुबह वेल्स के अधिकारी बूचड़खाना ले गए जहां उसे जहर की सुई देकर मौत की नींद सुला दिया जाएगा।
6 वर्षीय यह पवित्र सांड़ स्कंद वेल मंदिर में हिन्दू श्रद्धालुओं की आस्था और प्यार का प्रतीक बना हुआ था। वध के लिए अधिकारियों की गिरफ्त में आने से रोकने के लिए ब्रिटेन, स्विटजरलैंड और न्यूजीलैंड के दर्जनों हिन्दू मंदिर परिसर में मौजूद थे। सुरक्षाकर्मियों ने इन सभी हिन्दुओं को जबरन परिसर से हटाया और शैम्बो को अपने कब्जे में लिए। शैम्बो को भजन-कीर्तन, वैदिक मंत्रों के पाठ, प्रार्थना आदि के धार्मिक माहौल में अंतिम विदाई दी गयी। इस मौके पर सभी हिन्दू बेहद भावुक नजर आए और उनके चेहरे पर सरकार के प्रति नाराजगी और वितृष्णा का भाव स्पष्ट देखा जा सकता था। कई हिन्दुओं ने सरकार के खिलाफ जमकर आक्रोश प्रकट किया। शैम्बो को एक वाहन में लाद कर बूचड़खाना ले जाया गया। शुरू में हिन्दू कार्यकर्ताओं ने इन अधिकारियों को मंदिर परिसर में घुसने नहीं दिया। बाद में ये अधिकारी कोर्ट से वारंट लेकर वापस लौटे। पुलिसकर्मियों ने ताकत का इसतेमाल कर शैम्बो के इर्द-गिर्द बनी मानव श्रृंखला को तोड़ दिया।
द गार्जियन अखबार ने इस पूरे घटनाक्रम के लिए शैमब्लॉग नाम से एक ब्लॉग खोला था। इस ब्लॉग पर कई लोगों की प्रतिक्रिया मिली। इस ब्लॉग पर कई लोगों ने शैम्बो के लिए हिन्दुओं द्वारा चलाए गए अभियान के खिलाफ प्रतिक्रिया दी है। कुछ लोगों ने इस पूरी कवायद को अतार्किक और आधुनिक सोच से परे करार दिया है। कई लोगों ने शैम्बो को मौत के घाट उतारे जाने के सरकारी फैसले पर विरोध भी जताया है। इस बीच स्कंद वेल मंदिर के एक अधिकारी माइकल ने वेल्स एसेंबली के रवैये की जमकर आलोचना की है। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस मंदिर को अपभ्रष्ट किया है और एक निर्दोष प्राणी की जिंदगी नष्ट कर दी है। हिन्दू फोरम ऑफ ब्रिटेन के महासचिव रमेश कल्लीदई ने इस पर गहरा दुख प्रकट किया है।
स्थानीय प्रशासन द्वारा प्रतिबंध के बाजवूद उड़ीसा में एक काली मंदिर में देवी को खुश करने के लिए करीब 650 बकरों की बलि दे दी गई। बकरों की बलि भद्रक जिले के रामेश्वर गांव के रक्षया काली मंदिर में दी गई।
एक पुलिस अधिकारी ने स्वीकार किया कि मंदिर में बलि बेदी के चारों ओर खून के परनाले बह रहे थे। यहां तक कि कुछ लोग बकरों का खून सिर पर लगा कर देवी से आशीर्वाद की कामना कर रहे थे। अधिकारी ने अपना नाम गुप्त रखने की शर्त पर कहा कि कई लोगों को वहां खून का तिलक लगाए देखा गया। पिछले साल पशु अधिकारवादी कार्यकर्ताओं ने इस मंदिर में पशुओं की बलि पर हंगामा खड़ा किया था। तब राज्य के राजस्व मंत्री मनमोहन सामल की मौजूदगी में ही इस मंदिर में पशुओं की बलि दे दी गई थी। मंत्री को तब स्पष्टीकरण देना पड़ा था। एक सप्ताह पहले जिला प्रशासन ने इस बलि प्रथा को बंद कराने की कोशिश की थी। यहां तक कि शीर्ष जिला एवं पुलिस अधिकारी ने मंदिर कमेटी के सदस्यों और ग्रामीणों से इस मुद्दे पर बातचीत भी की थी। सूत्र ने बताया कि यह फैसला लिया गया था कि मंदिर में प्रतीकात्मक तौर पर एक ही पशु की बलि दी जाएगी, लेकिन इस समझौते का उल्लंघन किया गया।